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Saturday, 6 February 2010
निशुल्क शिविर आज
ग्रेवल सड़क बनवाने की मांग
विद्यार्थी मित्र मानदेय को तरसे
रानीवाड़ा! पंचायत समिति के तहत सरकारी विद्यालयों में अध्यापन में लगे हुए विद्यार्थी मित्रों ने आठ माह से मानदेय नहीं मिलने पर कड़ा रोष जताया है। विद्यार्थी मित्रों ने आगामी सात फरवरी तक मानदेय नहीं मिलने पर आठ फरवरी को पंचायत समिति के सामने धरना देने की चेतावनी दी है। ब्लॉक अध्यक्ष रामलाल ने बताया कि समस्या को लेकर उन्होंने कई बार जिला स्तरीय अधिकारियों से निवेदन भी किया, परंतु कोई समाधान नही हो पाया है। उन्होंने मानदेय का शीघ्र भुगतान करने का निवेदन किया है।
Friday, 5 February 2010
पार्टी प्रत्याशियों की हुई बाड़ाबंदी
विद्युत उपकेंद्र स्वीकृत करवाने की मांग
रानीवाड़ा! निकटवर्ती खारा गांव के ग्रामीणों ने विधायक रतन देवासी को पत्र भेजकर पंचायत मुख्यालय पर 33 केवी विद्युत सब ग्रिड स्वीकृत करवाने की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में विद्युत वोल्टेज की समस्या बनी रहती है। ऐसी स्थिति में खारा में 33केवी का विद्युत उपकेंद्र होने पर विद्युत संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान हो सकेगा। इस समय खारा में सरनाऊ 33 केवी से विद्युत आपूर्ति की जा रही है, जो खारा से 15 किलोमीटर दूर है।
Thursday, 4 February 2010
फर्जीवाड़े का मामला दर्ज
रानीवाड़ा! जालोर-सिरोही जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ द्वारा संचालित रानीवाड़ा की जसमूल डेयरी में एक व्यक्ति द्वारा फर्जी बिल बनाकर १३ टिन घी के चुराने का मामला सामने आया है। मामला २२ जनवरी का है। जिसके संबंध में डेयरी की ओर से पुलिस थाना रानीवाड़ा में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है।
सहायक थानाधिकारी शिवाराम ने बताया कि सांकड निवासी मोहनलाल पुत्र पोकरराम विश्नोई रानीवाड़ा डेयरी में बजरंगबली पथ में दूध का परिवहन करता है। २२ जनवरी को उसने १३ टिन घी का फर्जी बिल बनाकर डेयरी के गोदाम से 13 डिब्बे उठा लिए। इस बीच वह डेयरी के गेट पर कार्यरत सुरक्षा गार्डों की पकड़ में आ गया। जांच के दौरान ये बिल फर्जी पाए गए। सुरक्षा गार्डों द्वारा घी को जब्त करने के दौरान आरोपी मौका देखकर वहां से भाग खड़ा हुआ। बाद में प्रबंध संचालक ने पूरे घटनाक्रम की डेयरी अधिकारियों से जांच करवाई। जिसके बाद बुधवार को रानीवाड़ा थाने में धारा ४२० व ४७१ के तहत मामला दर्ज करवाया गया।
आत्मा योजना के तहत कार्यशाला
कृषि विभाग की आत्मा योजना के तहत बुधवार को जाखड़ी में देवड़ा कृषि फार्म पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के दौरान कृषि फार्म पर कृषि विभाग व कनाड़ा की मैकन्स कंपनी के सहयोग से तैयार की गई उत्तम किस्म की आलु की फसल का प्रदर्शन किया गया। कंपनी अधिकारियों के अनुसार यहां आलु की किस्म बाहर से मंगवाई गई है तथा प्रत्येक आलु का वजन आधा किलो से ज्यादा माना जाता है। कार्यशाला में कृषि विभाग के सहायक निदेशक बी.के. द्विवेदी, सहायक कृषि अधिकारी कन्हैयाला विश्नोई ने जल प्रबंधन, जैविक खेती व राज्य सरकार के द्वारा अनुदानित योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। पशुपालन विभाग के प्रवीणकुमार जोशी ने कृत्रिम गर्भाधान के बारे में बताया। कार्यशाला में सौ से ज्यादा किसानों ने भाग लिया।
Wednesday, 3 February 2010
लापरवाही से हुई परेशानी
कस्बे की इंदिरा कॉलोनी से मस्जिद जाने वाले मार्ग पर लम्बे समय से जमा कीचड़ राहगीरों व नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। सदर बाजार, पंचायत समिति, बेलदार कॉलोनी व इंदिरा कॉलोनी के घरों से बहकर आने वाला गंदा पानी मिस्त्री फार्म में जमा होने से यहां कीचड़ जमा हो गया है, जिससे यहां निवास करने वाले लोगों का दुर्गन्धयुक्त वातावरण में बुरा हाल हो रहा है।
मकानों को खतरा : यहां जमा कीचड़ के कारण आसपास के घरों की दीवारें भी कमजोर होने लगी है। ऐसे में मकानों के ध्वस्त होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। यह समस्या लम्बे समय से चल रही है, लेकिन ग्राम पंचायत की ओर से गंदे पानी की निकासी के लिए स्थाई समाधान नहीं किए जाने से यहां आवागमन करने में आमजन को परेशानी होती हंै।
-विधायक रतन देवासी की अनुशंसा पर इस वर्ष बीआरजीएफ योजना में यहां भूमिगत नाले के निर्माण को लेकर तकमीना बनाने के निर्देश मिल गए है। पीडब्ल्यूडी को इस कार्य के लिए अधिकृत किया गया है। स्वीकृति मिलते ही शीघ्र कार्य शुरू कर इसका स्थाई समाधान किया जाएगा।
भाणाराम बोहरा, ग्राम सेवक, रानीवाड़ा
राशन को तरसते हकदार
बडग़ांव (रानीवाड़ा)
नियमित रूप से प्रभावी निरीक्षण नहीं होने के कारण रानीवाड़ा उपखंड के बडग़ांव सहित कई गांवों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली से उपभोक्ताओं को कोई लाभ नहीं हो रहा है। बीपीएल के कई परिवारों को तो लंबे समय से केरोसीन और गेहूं तक नहीं मिल पाया है। राज्य सरकार ने इन गांवों में भले ही राशन की उचित मुल्य की दुकानों के लिए अनुज्ञापत्र जारी किए हों, लेकिन इन अनुज्ञापत्र धारियों द्वारा भारी अनियमितता की जा रही है। खास बात तो यह है कि सब कुछ सामने होने के बादजूद इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। पद खाली होने के कारण इन गांवों में लंबे समय से दुकानों का निरीक्षण ही नहीं हुआ है। जिसका खामियाजा लोगों को उठाना पड़ रहा है। कहीं केरोसिन की कालाबाजारी की जा रही है तो कहीं गेहंू के लिए उपभोक्ता भटक रहे हैं।
किसी की दुकान, किसी का काम
क्षेत्र के कई गांवों में तो हालात यह है कि दुकान किसी ओर के नाम से आवंटित है और उसे कोई ओर चला रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा होना आम बात है जहां सरकार की ओर से दुकान का लाईसेंस तो किसी ओर के नाम है और उसे चला कोई और रहा है। शेष & पेज ९
इतना ही नहीं किसी भी दुकान पर उपलब्ध सामग्री व भावों की कोई सूचना तक नहीं लिखी होती। इन दुकानों का ना तो खुलने का समय तय है और ना ही कोई वार। ऐसे में लोग बार बार चक्कर काट कर चले जाते हैं और उन्हें कोई सामग्री नहीं मिल पाती।
-इस क्षेत्र में निरीक्षक के पद खाली हैं। जिसके कारण लम्बे समय से निरीक्षण नहीं हो पा रहा है। व्यवस्था सुधारने का प्रयास किया जाएगा।
पुष्पराज पालीवाल, प्रर्वतन अधिकारी
चरम पर पहुंचा चुनावी रंग

क्षेत्र के विभिन्न गांवों में प्रथम चरण में होने वाले मतदान को लेकर जोरदार उत्साह है। गांवों में देर रात तक चौपालों पर चुनावी चर्चाएं चल रही हैं। गांव की सरकार चुनने का यह मौका हर ग्रामीण को भा रहा है। विशेषकर युवा इस बार इसमें ज्यादा रूचि ले रहे हैं।
मालवाड़ा क्षेत्र के गांव आखराड़ में चुनावी रंग पूरे शबाव है। गांव के सभी खंभे व दीवारें चुनावी पोस्टरों से अटे पड़े हैं। ग्रामीण बातचीत में बताते हैं कि वे अपने मताधिकार को लेकर सचेत हैं और वोट अवश्य डालेंगे। वोट किसे और क्यों दिया जाएगा के मुद्दे पर ये ग्रामीण चुप्पी साध लेते हैं। ऐसे में परिणाम क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता, लेकिन यह अवश्य है कि अब इनके आस पास की समस्याएं इन्हें ज्यादा प्रभावित करती हैं। गांव में सरपंच पद को लेकर खासा उत्साह है। दावेदार अभी से सैंकड़ों समर्थकों के साथ हाथ जोड़ घर-घर वोट की गुहार कर रहें हैं।
क्षेत्र के मेड़ा गांव में भी कमोबेश यही हाल है। गांव में लोग समूहों में बैठे चुनावों पर चर्चा करते देखे जा सकते हैं। यहां से कुछ दूरी पर गोलवाड़ा सिलासन, चरपटिया, दूदवट सहित रानीवाड़ा खुर्द में भी चुनाव पूरे रंग पर हैं। यहां कहीं कहीं मतदाताओं के लिए भोजन की व्यवस्था प्रत्याशियों की ओर से की गई है। सुणतर क्षेत्र के गांवों में भी चुनावी पूरे रंग में दिखा। ग्राम पंचायत बडग़ांव में प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ रात को भी चुनाव प्रचार में जुटे हुए थे। गांव की गलियों में जमा कीचड़ व कंपकंपी छुड़ा देने वाली ठंड के बावजूद उनके जोश में कोई कमी नहीं थी। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में रोजाना अलग-अलग पदों के दावेदार दस्तक दे रहे हंै। गांव धामसीन में भी रात्रि में ग्रामीण घरों के बाहर चबूतरों पर बैठे चुनावी चर्चा करते दिखे।
घंूघट की ओट में मांगे वोट
कंधे तक घूंघट, बड़े-बूढ़ों के मिलने पर तुरन्त पैर छूना। कुछ ऐसा ही नजारा गांव मालवाड़ा, सेवाड़ा, रानीवाड़ा आदि में देखने को मिल रहा है। इन गांवों मेंं कुछ महिला प्रत्याशी घंूघट की ओट में वोट की गुहार करती नजर आई। महिलाओं के साथ महिला कार्यकर्ताओं के साथ-साथ पुरूष कार्यकर्ता भी चल रहे थे। वह विकास का दावा कर लोगों से अपने चहेते प्रत्याशी को वोट देने की अपील कर रहे थे।
Sunday, 31 January 2010
अफ्रीकन चिकोरी अब सुणतर में
दक्षिण अफ्रीका व ईजराईल में प्रचुर मात्रा में पैदा होने वाली प्रोटिनयुक्त चिकोरी औषधी सुणतर क्षेत्र के धामसीन गांव में पहुंच गई है। इस गांव में इस औषधीय पौधे की खेती की जा रही है और अगर यह सफल होती है तो यकीनन किसानों के लिए काफी फायदेमंद होगी। औषधी निर्माण के अलावा इस पौधे का उपयोग कॉफी पाउडर में भी किया जाता है। पालनपुर निवासी अरविंद पटेल ने धामसीन के भीमसिंह देवड़ा के कृषि फार्म पर प्रथम बार प्रयोग कर औषधीय खेती में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं।
क्या है चिकोरी : चिकोरी एक प्रकार का पौधा है। जिसकों जड़ों में प्रोटिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। कसैला स्वाद होने के कारण इस औषधि को काफी में मिक्स किया जाता है। पटेल के अनुसार इस पौधे की जड़ों को आयुर्वेदिक औषधि बनाने में किया जाता है। इसका बीज ईजराईल से मंगवाया जाता है। पौधा सूखने के बाद स्वादिष्ट होने से इसको दुधारू पशुओं को खिलाने पर दूध की मात्रा में इजाफा होता है।
अनुकूल है जलवायु
चिकोरी के लिए उष्णीय जलवायु अनुकूल मानी जाती है। जिसके लिए पश्चिमी राजस्थान अच्छा माना गया है। रानीवाड़ा क्षेत्र में अभी इसका प्रयोग किया जा रहा है अगर यह सफल होती है तो अन्य किसान भी इसे अपना सकेंगे। जिससे उन्हें अतिरिक्त आया हो सकेगी।
किसानों के लिए फायदेमंद
रा नीवाड़ा में इसे अभी प्रायोगिक तौर पर किया जा रहा है, लेकिन अगर यह सफल होती है तो इसका किसानों को फायदा होगा। खेती की सार संभाल कर रहे सोमाराम मेघवाल ने बताया कि चिकोरी की बुवाई सितम्बर में की जाती है तथा फरवरी में पौधा परिपक्व हो जाता है। जड़ों को थ्रेसर में छोटे-छोटे टुकड़ों में बदलने के बाद सुखाया जाता है। बाद में यह कॉफी में मिश्रण के लिए तैयार हो जाती है। उन्होंने बताया कि एक बीघा खेती में एक हजार रूपए का खर्चा होता है तथा इससे पन्द्रह हजार रूपए की आय अर्जित की जा सकती है। चिकोरी के हरे पौधे को पालतु व जंगली जानवर नष्ट नहीं करते हंै।