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Sunday, 14 March 2010

केसर से होने लगी कमाई


रानीवाड़ा!धानोल के एक खेत में कश्मीर का केसर खुशबु बिखेर रहा है। रंग बिरंगें फुलों की छटा यहां देखते ही बनती है।
केसर क्यारियों के कारण आस-पास के खेतों में इसकी खुशबु महक रही है। गांव के केवाराम चौधरी ने करीब तीन माह पूर्व अपने खेत में एक बीघा कृषि भूमि में माउंट आबू की ब्रह्माकुमारी संस्था से केसर के बीज लाकर उगाए थे। अब इन बीजों से पौधे बन गए हैं जो केसर के फूलों से महक रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पूर्व भास्कर ने बताया था कि क्षेत्र के किसान खेतों में केसर उगा रहे हैं और उनका यह प्रयोग सफल होता है तो इससे किसानों की तकदीर भी बदल सकती है। अब जैसे जैसे केसर पर फूल आ रहे हैं। किसानों के चेहरे भी खिल रहे हैं। क्षेत्र में केसर की खेती सभी किसानों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।
प्रगतिशील किसान चौधरी ने प्रथम में प्रयोग कर सफलता प्राप्त की है। उन्होंने अब केसर उतारना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं आधा किलों केसर डीसा के बाजार में पचास हजार रूपए प्रतिकिलों के भाव से बेची भी है। चौधरी ने बताया कि कश्मीर की जैसी जलवायु इस क्षेत्र की नही है, फिर भी ऐसी भौगोलिक परिस्थितियों में भी केसर की खेती आशा के अनुरूप खरी उतरी है। एक बीघा जमीन में दो किलो केसर निकलने की संभावना है। इस खेती में कम लागत से ज्यादा आमदनी हो रही है।
किसानों के लिए प्रेरणा बनी फसल

कृषि विभाग के अधिकारी कन्हैयालाल विश्नोई ने बताया कि निसंदेह धानोल में केसर की खेती हो रही है, परंतु कश्मीर जैसी जलवायु नहीं मिलने के कारण गुणवत्ता के मामले में कुछ कम है। इस केसर की खेती की सफलता को देखते हुए काफी किसानों ने अब चौधरी की राह अपनाने का निर्णय लिया है। इस वर्ष नवंबर महिने में काफी किसान सुणतर क्षेत्र के काफी किसान अपने खेतों में केसर उगाएंगे। बकौल, चौधरी ने बताया कि उनके इस प्रयोग का निरीक्षण करने के लिए गुजरात की दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय की टीम ने दौरा किया। उनके द्वारा दिए गए दिशा निर्देशन में इस खेती की सार-संभाल करने पर ही यह प्रयोग सफल हो पाया है। इस खेती से किसान को डेढ़ लाख रूपए आय होने की संभावना है।

1 comment:

Jagadish Aanjana khetlawas said...

me bhi kesar ki kheti karana chahta hu please mere ko jankari de 8291166632
jagadishaanjana@gmail.com
jalore