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Wednesday, 29 June 2011

जालेराकलां में बनेगी नई मंडी

किसानों को नहीं जाना पड़ेगा गुजरात, चार दीवारी एवं चैक पोस्ट निर्माण के लिए 53 लाख रुपए की स्वीकृति 
रानीवाड़ा 
जिला प्रशासन ने रानीवाड़ा में स्वतंत्र कृषि उपज मंडी की कवायद शुरू कर दी है। तहसीलदार ने कृषि मंडी के लिए जालेरा कलां में भूमि का चयन कर ग्राम पंचायत को राशि का भुगतान भी कर दिया है। चार दीवारी एवं चैक पोस्ट निर्माण के लिए 53 लाख रुपए की स्वीकृति भी मिल गई है। इस मंडी का फायदा किसानों को होगा। अब वे गुजरात की बजाय इस मंडी में अपने जींस की बिक्री कर ज्यादा लाभ अर्जित कर सकेंगे।
जानकारी के मुताबिक, जिले में रानीवाड़ा तहसील में प्रचुर मात्रा में भू-जल संपदा होने से यहां पर एक साल में तीन फसलें किसान लिया करते हैं। जिले में कृषि विपणन व्यवस्था सुव्यवस्थित नहीं होने के कारण अधिकतर किसान अपनी फसल को गुजरात की मंडियों में बिक्री के लिए ले जाते हैं। गत विधानसभा चुनावों में वर्तमान विधायक रतन देवासी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में रानीवाड़ा की गौण मंडी को भीनमाल मंडी से अलग कर संपूर्ण मंडी का दर्जा देने का वादा किया था। जिसके बाद यह कवायद की जा रही है।
संपूर्ण मंडी होगी जालेरा में 
वर्तमान में रानीवाड़ा उपखंड पर गौण मंडी संचालित की जा रही है, परंतु पर्याप्त मात्रा में किसानों एवं व्यापारियों के लिए सुविधाएं नहीं होने के कारण मंडी को अपेक्षित लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो रही है, जबकि जिले की सर्वाधिक पैदावार रानीवाड़ा क्षेत्र में ही होती है। विधायक के प्रयासों से उपखंड प्रशासन ने संपूर्ण मंडी के लिए कस्बे से तीन किलोमीटर दूर सांचौर सड़क मार्ग पर जालेरा कलां गांव में 4.84 हैक्टेयर जमीन का चयन किया। इस जमीन को डी.एल.सी. की दर पर भीनमाल मंडी ने खरीद कर 8.14 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया गया है। भीनमाल मंडी के सचिव हरी राम जोशी ने गत 21 जून को तहसीलदार खेताराम राणा एवं ग्राम पंचायत के सरपंच रेवाराम भील से बाकायदा कब्जा भी ले लिया है। अब इस जमीन की एक दो दिनों में सफाई शुरू हो जाएगी। इसके बाद यहां चार दीवारी का कार्य करवाया जाएगा। बाद में सुव्यवस्थित एवं सुनियोजित ढंग से आधुनिक मार्केट यार्ड, चैक पोस्ट, कार्यालय, पेयजल व्यवस्था के लिए उच्च जलाशय, किसान भवन एवं गोदाम का निर्माण किया जाएगा।
जरूरत है कोल्ड स्टोरेज की 
रानीवाड़ा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आलू, प्याज और टमाटर सहित कई प्रकार की सब्जियों की पैदावार होती है, परंतु स्टोरेज की व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान कम मूल्य में अपनी पैदावार बेच देते हैं। रानीवाड़ा से 70 किलोमीटर दूर गुजरात के डीसा शहर में 50 से ज्यादा कोल्ड स्टोरेज बने हुए हैं। उसी की तर्ज पर रानीवाड़ा क्षेत्र में भी कृषि मंडी परिसर में कोल्ड स्टोरेज की जरूरत है, ताकि किसान टमाटर पर आलू लंबे समय तक कोल्ड स्टोरेज में रखकर ज्यादा मुनाफा कमा सके।

Friday, 16 July 2010

किसानसंघ ने दिया ज्ञापन

रानीवाड़ा(16.07.2010)
क्षेत्र के किसानों की कई समस्याओं को लेकर गुरुवार को भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। विभागाध्यक्ष सोमाराम चौधरी ने बताया कि नए कृषि कनेक्शन में विभाग के द्वारा फव्वारा सेट व ३ स्टार विद्युत मोटर की खरीद अनिवार्य करने से किसानों पर आर्थिक भार बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि बूंद-बंूद सिंचाई की पद्धति नरम कृषि भूमि में ही संभव है। रानीवाड़ा तहसील के अधिकांश खेतों में काली कठोर मिट्टी होने की वजह से यह सिस्टम सफल नहीं हो पाएगा। चौधरी ने नए बिजली कनेक्शनों में सरलीकरण करने का निवेदन किया है।

तहसील अध्यक्ष सेणीदान चारण ने बताया कि क्षेत्र में मौसम की अच्छी बरसात होने की वजह से किसानों ने बाजार से हाईब्रिड बाजरा खरीदकर बुवाई की है, लेकिन किसानों को नकली बीज दिए गए हैं। खेतों में बाजरे की फसल जमीन से बाहर भी नहीं आई है। ऐसे आरोपी बीज विक्रताओं के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने का निवेदन किया है। इस अवसर पर काफी तादाद में संघ के सदस्य व किसान उपस्थित थे।

Wednesday, 28 April 2010

आश्वासन के बाद किसानों का धरना समाप्त

रानीवाड़ा।
स्थानीय बिजलीघर के आगे गत तीन दिनों से भारतीय किसान संघ के बैनर तले सैकड़ों किसानों का चल रहा अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को डिस्काम के अधिशासी अभियन्ता व सहायक अभियन्ता द्वारा किसानों की ग्यारह सूत्रीय मांगों पर दिए आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। धरनास्थल पर चली चार घंटे की लम्बी समझाइश वार्ता के दौरान कई बार आक्रोशित किसान अधिकारियों से उलझते रहे। विशेषकर कृषि विद्युत आपूर्ति, विद्युत बिलों में गड़बडियां एवं विद्युत सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं करवाने के चलते किसानों ने अधिकारियों को खूब खरी खोटी सुनाई।
डिस्काम के अधिशासी अभियन्ता आशाराम जांगीड़, सहायक अभियन्ता तरूण खत्री एवं किसान संघ के अध्यक्ष सेणीदान चारण, विभाग अध्यक्ष सोमाराम चौधरी, उपाध्यक्ष रामलाल साहू, मंत्री मालमसिंह पूरण के मध्य हुई चार घंटे तक समझाइश वार्ता के दौरान अधिकारियों ने किसानों को नियमित छ: घण्टे विद्युत आपूर्ति देने एवं विद्युत बिलो में गड़बडियों सहित विभिन्न समस्याओं के निराकरण का आश्वासन दिया तथा जले हुए ट्रांसफार्मर किसानों को 72 घंटे में उपलब्ध करवाने का भरोसा दिलावाया।
नए कनेक्शन के लिए शीघ्र विद्युत सामग्री मुख्यालय पर उपलब्ध करवाने के लिए ठेकेदार को पाबन्द करने का भरोसा दिलवाया। किसानों की मांग के मुताबिक विजिलेंस टीम के सर्वे का पुनर्मूल्याकंन करने का आश्वासन दिया।

Tuesday, 27 April 2010

धरना जारी

रानीवाड़ा।
भारतीय किसान संघ के बैनर तले आज दूसरे दिन भी किसानों का धरना जारी रहा। किसान दो दिन से कृषि विद्युत आपूर्ति व अन्य समस्याओं को लेकर डिस्काम कार्यालय के सामने धरना दे रहे है। तहसील अध्यक्ष सेणीदान चारण ने बताया कि आज दूसरे दिन सहायक अभियंता तरूण खत्री से किसानों के प्रतिनिधियों की वार्ता हुई, परंतु मांगे नही मानने पर किसानों ने धरना जारी रखने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि इस समय जायद की फसल चरम पर है, किसानों को राज्य सरकार मात्र ३ से ४ घंटे विद्युत आपूर्ति कर रही है, जबकि किसानों को सात घंटे विद्युत आपूर्ति की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि कनेक्शनों के विद्युत भार की जांच करवाने में भेदभाव का आरोप लगाया है। सुपर ट्रांसफार्मर व स्पॉर्ट बिलिंग को लेकर भी किसानों को भारी समस्याए देखने को मिल रही है।

सुचारू बिजली आपूर्ति की मांग

रानीवाड़ा
भारतीय किसान संघ ने उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित कर सुचारु बिजली आपूर्ति की मांग की है। भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष चेणीदान ने ज्ञापन प्रेषित कर बताया कि वर्तमान में किसानों को जायद फसल की बुआई के लिए ३ से 4 घंटे बिजली मिलती है तथा पहले यह 7 घंटे मिलती थी। किसानों ने बताया कि विद्युत की आपूर्ति कम होने के कारण फसले सुख रही हैं तथा फसलों को बचाने के लिए कम से कम ७ घंटे बिजली जरूरी है। संघ के विभाग अध्यक्ष सोमाराम चौधरी ने बताया कि इससे पूर्व १५ अप्रेल को भी ज्ञापन दिया था, लेकिन उसका समाधान नहीं हुआ। इसलिए मजबूरन २६ अप्रेल को विद्युत निगम कार्यालय के सामने अनश्चितकालिन धरना दिया जाएगा।

Friday, 9 April 2010

मुआवजा राशि में भेदभाव का आरोप लगाया

रानीवाड़ा
खरीफ की फसल में हुए नुकसान की भरपाई के लिए दिए जा रहे मुआवजा राशि को लेकर किसानों ने प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाया है। पंचायत समिति सदस्य सायतीदेवी विश्नोई ने बताया मौखातरा गांव में दर्जनों किसानों के साथ भेदभाव कर मुआवजे से वंचित किया गया है। इसी प्रकार रानीवाड़ा कस्बे के दो दर्जन किसानों ने गुरूवार को तहसीलदार खेताराम सारण से मिलकर अतिरिक्त सूची में नाम जुड़वाने की मांग की है। किसान भीखाराम मेघवाल ने बताया कि पटवारी द्वारा सर्वे सही नहीं कर पटवारघर में बैठ कर गिरदावरी भरी गई है। उन्होंने कहा कि सही मुआवजा राशि नहीं देने पर विरोध प्रर्दशन किया जाएगा।

Sunday, 14 March 2010

केसर से होने लगी कमाई


रानीवाड़ा!धानोल के एक खेत में कश्मीर का केसर खुशबु बिखेर रहा है। रंग बिरंगें फुलों की छटा यहां देखते ही बनती है।
केसर क्यारियों के कारण आस-पास के खेतों में इसकी खुशबु महक रही है। गांव के केवाराम चौधरी ने करीब तीन माह पूर्व अपने खेत में एक बीघा कृषि भूमि में माउंट आबू की ब्रह्माकुमारी संस्था से केसर के बीज लाकर उगाए थे। अब इन बीजों से पौधे बन गए हैं जो केसर के फूलों से महक रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पूर्व भास्कर ने बताया था कि क्षेत्र के किसान खेतों में केसर उगा रहे हैं और उनका यह प्रयोग सफल होता है तो इससे किसानों की तकदीर भी बदल सकती है। अब जैसे जैसे केसर पर फूल आ रहे हैं। किसानों के चेहरे भी खिल रहे हैं। क्षेत्र में केसर की खेती सभी किसानों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।
प्रगतिशील किसान चौधरी ने प्रथम में प्रयोग कर सफलता प्राप्त की है। उन्होंने अब केसर उतारना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं आधा किलों केसर डीसा के बाजार में पचास हजार रूपए प्रतिकिलों के भाव से बेची भी है। चौधरी ने बताया कि कश्मीर की जैसी जलवायु इस क्षेत्र की नही है, फिर भी ऐसी भौगोलिक परिस्थितियों में भी केसर की खेती आशा के अनुरूप खरी उतरी है। एक बीघा जमीन में दो किलो केसर निकलने की संभावना है। इस खेती में कम लागत से ज्यादा आमदनी हो रही है।
किसानों के लिए प्रेरणा बनी फसल

कृषि विभाग के अधिकारी कन्हैयालाल विश्नोई ने बताया कि निसंदेह धानोल में केसर की खेती हो रही है, परंतु कश्मीर जैसी जलवायु नहीं मिलने के कारण गुणवत्ता के मामले में कुछ कम है। इस केसर की खेती की सफलता को देखते हुए काफी किसानों ने अब चौधरी की राह अपनाने का निर्णय लिया है। इस वर्ष नवंबर महिने में काफी किसान सुणतर क्षेत्र के काफी किसान अपने खेतों में केसर उगाएंगे। बकौल, चौधरी ने बताया कि उनके इस प्रयोग का निरीक्षण करने के लिए गुजरात की दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय की टीम ने दौरा किया। उनके द्वारा दिए गए दिशा निर्देशन में इस खेती की सार-संभाल करने पर ही यह प्रयोग सफल हो पाया है। इस खेती से किसान को डेढ़ लाख रूपए आय होने की संभावना है।