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Friday, 24 June 2011

सुंधा ट्रस्ट पर सरकारी साया


रानीवाड़ा। 
प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री सुंधामाता ट्रस्ट पर अब सरकारी साया पडने वाला है। देवस्थान विभाग उदयपुर ने ट्रस्ट की आय-व्यय की निगरानी के लिए जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर ट्रस्ट को प्राप्त होने वाली राशि की गणना में पारदर्शिता एवं नियमितता को लेकर अधिकृत किया है।
जानकारी के मुताबिक, राजस्थान, गुजरात सहित देश के कई राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बने श्री सुंधामाता तीर्थ को संचालित करने वाले श्री चामुण्ड़ा माताजी मंदिर ट्रस्ट में पिछले कई वर्षों से अनियमितताए एवं धांधली की शिकायत मिल रही थी। इन शिकायतों को लेकर गत जिला परिषद की बैठक में विधायक रामलाल मेघवाल ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जिसका अनुमोदन सदन ने सर्व सम्मति से पारित कर ट्रस्ट की गतिविधियों एवं आय-व्यय में पारदर्शिता के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखकर रिसीवर लगाने का निवेदन किया था। जिला कलेक्टर ने जिला परिषद के इस प्रस्ताव को क्रियान्वयन करने के लिए राज्य सरकार को भेजा जहांं से सरकार की सकारात्मक टिप्पणी के साथ देवस्थान विभाग उदयपुर को पत्र प्रेषित किया गया है। जिस पर देवस्थान विभाग ने 10 जून को जिला कलेक्टर जालोर को पत्र प्रेषित कर श्री चामुण्ड़ा माताजी ट्रस्ट, सुंधापर्वत, दांतलावास तहसील भीनमाल में प्रशासनिक अधिकारी को नियुक्त कर पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
जिस पर जिला कलेक्टर के.के. गुप्ता 21 जून को नए निर्देश जारी कर श्री चामुण्ड़ा माताजी ट्रस्ट सुंधापर्वत में प्राप्त होने वाली राशि की गणना में पारदर्शिता एवं नियमितता के परिपेक्ष्य में मंदिर के भण्ड़ार तथा अन्य प्राप्त होने वाली भेंट राशि की गणना के लिए उपखंड अधिकारी, भीनमाल को मनोनित कर राज्य सरकार के निर्देशों की पालना करने के लिए पांबद किया है।
क्या है निर्देश :- सुंधामाता तीर्थ पर प्रतिमाह लाखों रूपए एवं सोने चांदी के गहनों की आवक होती है। अब नए निर्देशों के तहत ट्रस्ट के द्वारा संचालित भण्ड़ार को माह में एक बार निश्चित तिथि को एसडीएम के समक्ष खोला जाएगा। भण्ड़ार खोलने पर उसमें प्राप्त होने वाली राशि एवं अन्य सामग्री का लेखा-जोखा एसडीएम के समक्ष संधारित किया जाएगा। पूरा विवरण प्रत्येक माह मंदिर के पास ट्रस्ट कार्यालय के बाहर नोटिस बोर्ड पर एवं उपखंड कार्यालय भीनमाल में चस्पा किया जाएगा, ताकि कोई भी श्रद्धालु ट्रस्ट की आय-व्यय को पारदर्शिता पूर्वक देख सके। इसी तरह मंदिर के नाम पर काटी जाने वाली रसीदों एवं दी जाने वाली भैंटों अर्थात गहनों का हिसाब-किताब इसी दिन एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसका सम्पूर्ण लेखा-जोखा नोटिस बोर्ड पर लगाना आवश्यक माना गया है। साथ ही ट्रस्ट की गतिविधियों, आय-व्ययों की जानकारी सहित नए होने वाले कार्यों की मासिक रिपोर्ट जिला कलेक्टर को प्रेषित करनी आवश्यक होगी।
क्या होगी भावी कार्यक्रम :- प्रशासनिक हल्कों से मिली जानकारी के अनुसार श्रीनाथजी मंदिर नाथद्वारा की तर्ज पर श्री सुंधामाता मंदिर का संचालन राज्य सरकार देवस्थान विभाग को सौंपेगा। इससे पूर्व प्रत्येक माह की निश्चित तिथि को एसडीएम के समक्ष खुलने वाले भण्ड़ारे में से निकलने वाली दान राशि एवं भैंट की गणना के लिए विडियों केमेरे एवं सीसी टी.वी. केमेरे लगाए जाएंगे, ताकि कोई भी श्रद्धालु मंदिर के बाहर भी खड़ा-खड़ा भण्ड़ारे से निकलने वाली राशि की गणना होते देख सकता है। गौरतलब यह है कि इस ट्रस्ट में कई वर्षों से लाखों रूपए के घोटाले होते आए है।
इनका कहना :-
-जिला परिषद जिले की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था होती है। गत बैठक में जनप्रतिनिधियों के द्वारा ट्रस्ट की गतिविधियों में अनियमितता को लेकर पारित किए गए प्रस्ताव पर देवस्थान विभाग ने निर्देश जारी कर आय-व्यय पर निगरानी के लिए प्रशासनिक अधिकारी लगाने का कहा है, जिस पर हमने भीनमाल एसडीएम को निगरानी के लिए नियुक्त कर दिया है और इन निर्देशों की जानकारी ट्रस्ट के सचिव एवं अध्यक्ष को भी दे दी है।
-केवल कुमार गुप्ता जिला कलेक्टर, जालोर
-राज्य सरकार ने वित्तिय व्यवस्थाओं की पारदर्शिता के लिए यह कदम उठाया है और अन्य बिंदुओं पर भी जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी। इससे जो सुंधा पर्वती य तीर्थ स्थल के विकास की राह सुदृढ होगी।
-रतन देवासी विधायक, रानीवाड़ा

Tuesday, 4 January 2011

होना चाहिए धार्मिक पर्यटन का विकास

रानीवाड़ा
प्रसिद्ध तीर्थ स्थल सौमरा माताजी को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने को लेकर क्षेत्र के लोगों ने भी माना है कि इस स्थान का विकास होना चाहिए। ताकि यहां पर्यटन स्थल बन सके और साथ ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भी सुविधा हो। इस संबंध में विधायक रतन देवासी ने भी कहा कि हालांकि सौमरा माताजी स्थल को विकसित करने के लिए पहले से कुछ योजनाएं हैं, लेकिन अब और भी योजनाएं चलाकर इस स्थान का विकास करवाया जाएगा। गौरतलब है कि दैनिक भास्कर ने अपने सोमवार के अंक में 'विकास हो तो मिले पहचानÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर इस स्थान के विकास की आवश्यकता जताई थी।

इस स्थान के विकास और यहां धार्मिक पर्यटन के विकास को लेकर सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता अमृतलाल वर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने धार्मिक पर्यटन को विकसित करने को लेकर एक योजना कुछ महीनों पहले शुरू की थी। उस योजना के तहत विधायक रतन देवासी की अनुशंषा पर डाडोकी गांव से सौमरा माताजी पर्वत की तलहटी तक कच्चे सड़क को डामरीकरण करने का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा था। इसकी मंजूरी मिल गई है और शीघ्र ही लगभग ५३ लाख रुपए की लागत से २.५ किलोमीटर लंबी इस सड़क के काम को शुरू करवाया जाएगा। इसी प्रकार तलहटी से पर्वत के ऊपर स्थित मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ी निर्माण का कार्य भी स्वीकृत हो गया है। यह काम विधायक कोष से 5 लाख रुपए की लागत से करवाया जाएगा।

-धार्मिक पर्यटन स्थलों को विकसित करने के राज्य सरकार के निर्देशों के तहत इस ऐतिहासिक पवित्र तीर्थ स्थल के विकास में धन की कमी आने नहीं दी जाएगी। मुख्य मंदिर के पास सामुदायिक सभा भवन का निर्माण करवाया जाएगा।

-रतन देवासी विधायक, रानीवाड़ा

-सौमरा माताजी मंदिर का इतिहास सुंधामाताजी के समकालीन होने से इस तीर्र्थ स्थल का पौराणिक महत्व है। तीर्थ स्थल को विकसित करने में दानदाताओं एवं ग्रामीणों को भी सहयोग करना चाहिए।

-ऊकसिंह परमार, समाजसेवी सिलासन

-क्षेत्र के इस प्रसिद्ध शक्तिपीठ को विकसित करने का कार्य काफी लंबे समय से प्रस्तावित है, परंतु प्रशासन के सहयोग बिना कार्य संभव नहीं था। अब इसके विकास के कार्य करवाए जाएंगे।

- झमका कंवर, सरपंच, सिलासन

Tuesday, 28 September 2010

पर्यटन की बहार, संरक्षण की दरकार

रानीवाड़ा
उपखंड़ क्षेत्र में पुरा महत्त्व की ऐतिहासिक धरोहरों की बहार है। प्रकृति का सुरम्य वातावरण अरावली पर्वतमालाओं से लेकर धरा पर बिखरा पड़ा है। पर्यटन की दृष्टि इन्हें विकसित किए जाए तो ट्यूरिज्म को बढ़ावा मिल सकता है। इससे आर्थिक रूप से पिछड़ापन भी दूर होगा। साथ ही रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। 

उपखंड मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर सुंधांचल पर्वत पर सुंधामाता तीर्थ, प्रस्तावित अभ्यारण और इससे आगे जसवंतपुरा क्षेत्र में प्रकृति ने अनूठे नजारे बनाए हुए हंै। पहाड़ों के बीच जगह-जगह बहते झरने, चारो ओर छाई हरितिमा लोगों का यहां बरबस ही आकर्षिक करती है। इन स्थानों पर दूरदराज क्षेत्रों से पर्यटक भी पहुंचे हंै, लेकिन प्रकृति की इस अनमोल धरोहरों के संरक्षण और उन्हें विकसित करने के प्रयास नहीं हो रहे हैं। 

यही वजह है कि अरावली पर्वतमाला के लोहियाणा गढ़ व सुंधामाता तीर्थ टयूरिज्म मानचित्र पर अपनी जगह नही बना पाए हंै। जाविया के ६ माह तक झर-झर बहते झरने अभी तक अपनी पहचान नहीं बना सके हैं। सेवाड़ा में १२ सौ साल पुराना पातालेश्वर शिव मंदिर, रतनपुर के खंडहरनुमा जैन मंदिर, गोधाम पथमेड़ा, सिलेश्वर मंदिर, सौमेरी माताजी मंदिर, वाडोल की घाटी, बारहमासी बहने सुकळ नदी आदि स्थान लोगों को खूब भाते हंै।

गोड़वाड़ सर्किट में होगा शामिल

उपखंड सहित समूचे जिले में पर्यटन की विपुल संभावनाओ को देखते हुए विधायक रतन देवासी ने पर्यटनमंत्री बीना काक को पत्र लिखकर जिले को गोड़वाड़ ट्यूरिस्ट सर्किट में जोडऩे की मांग की है। मंत्री ने भी विधायक के इस निवेदन पर सकारात्मक प्रतिक्रिया जाहिर कर सर्वें के निर्देश दिए हैं। गोड़वाड़ सर्किट में जुडने से जिले में विदेशी पर्यटकों के साथ घरेलू पर्यटक भी जिले की ओर आकर्षित होंगे।

हेरिटेज होटल्स की है संभावना

क्षेत्र में रियासतकालीन रजवाड़े व ठिकानों में बनी पुरातत्व की अनके वस्तुएं भी लोगों को आकर्षित कर सकती हैं। अभी भी कई लोग इन्हें देखने आते हैं। बडग़ांव गढ़, मालवाड़ा रावला, चाटवाड़ा, सांचौर में सूराचंद, चितलवाना, कोरी, पूरण, दांतलावास, गजापुरा, डोरड़ा सहित कई गांवों में स्थित प्राचीन गढ़ पर्यटकों की तादाद बढने पर हेरिटेज होटल में तब्दिल हो सकते हैं।

भालू अभ्यारण्य से होगा फायदा

राज्य सरकार द्वारा सुंधापर्वत माला में प्रस्तावित भालू अभ्यारण से भी वन्यजीव प्रेमियों का रूझान इस क्षेत्र की ओर बढ़ेगा। राज्य में भालू जैसी दुर्लभ प्रजाति के सरंक्षण व संर्वधन को लेकर यह सरकार का प्रथम प्रयास है। वन्य जीव प्रेमियों में काफी तादाद विदेशी पर्यटकों की होने की संभावना को देखते हुए राजस्व का भी सरकार का फायदा होगा। इसी प्रकार कच्छ के रण से लगता हुआ जिले का नेहड़ क्षेत्र भौगोलिक स्थितियों में जिले के लिए अनूठा क्षेत्र है। एक तरफ पाकिस्तान सीमा तथा दूसरी ओर कच्छ का रण इस क्षेत्र को अन्य क्षेत्र से विशेष दर्जा देते हैं। जंगली वन्यजीव की भरमार व लेण्ड ऑफ पिकोक यानी मोर की ज्यादा तादाद होने से यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए पंसदीदा पर्यटक स्थल बन सकता है।

जिले को सर्किट से जोडऩे की संभावना है

- पर्यटन मंत्री बीना काक से व्यक्तिगत अनुरोध कर जिले को गोड़वाड़ सर्किट में जोडऩे का निवेदन किया है। अतिशीघ्र सर्वे पूरा होने के बाद जिले को सर्किट में जोडऩे की संभावना है।

- रतन देवासी, विधायक रानीवाड़ा

Wednesday, 11 August 2010

खोडेश्वर पर पहुंचे पर्यटक




 रानीवाड़ा
सावन में रिमझिम-रिमझिम फुहारों के बीच चारों ओर हरीतिमा से आच्छादित पहाडिय़ों पर इन दिनों पर्यटर आने लगे हैं। रविवार को छुट्टि का दिन होने से क्षेत्र के पहाड़ों और झरनों पर लोगों की अच्छी भीड़ उमड़ी।

पर्यटकों की यह जोरदार आवजाही सुंधांचल के खोडेश्वर महादेव तीर्थ पर देखी गई। जहां दिन भर मेला सा लगा रहा। इतना ही नहीं यहां प्रकृति को नजदीक से देखने के लिए विदेशी पर्यटक भी पहुंचे। इस मंदिर के चारों और पहाड़ों पर इन दिनों प्राकृतिक छटा की जितनी तारीफ करें उतनी कम है। कई नयनाभिराम झरने बारिश की फुहारों के साथ ही परवान चढऩे लगे हंै। 

जाविया ब्लाक के लगायत सुंधा पर्वत के झरने तक सभी जीवंत हो उठे है। इकोप्वाइंट से खोडेश्वर घाटी का विहंगम नजारा और बादलों की ओट में छुपे पहाड़ों को देखना बेहद नयनाभिराम है। ये सभी स्थल घने वृक्षों से 
घिरे है और जंगल में है। पर्वतीय घाट की चट्टानों से सर्पीले आकार में बहते पानी से निकलने वाली संगीतमय ध्वनि तो अच्छी लगती ही है साथ ही दृश्य भी मनोरम हो चला है। सुंधामाताजी के झरने की तरह खोडेश्वर घाट का जल प्रपात दूर से ही आकर्षित करने लगा है।

चारों ओर खुशनुमा माहौल

रिमझिम फुहारों का मनभावन मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे खुशनुमा माहौल में ऐसा कौन शख्स होगा जो अपने घर में कैद होकर बैठना चाहेगा। बारिश की झड़ी जहां हर व्यक्ति को पानी में भीगने का आनंद लेने के लिए उकसा रही है, वहीं मन-मयूर भी प्रकृति के निकट पहुंचकर उसकी सुंदर छटा में खो जाने को अधीर व लालायित है। भीगे मौसम में जब प्रकृति ने हरियाली की मोहक चूनर ओढ़ ली है तब आसपास के प्राकृतिक, धार्मिक और पुरा-महत्व के रमणीय स्थल सैर-सपाटे की दावत देकर अपनी तरफ आकर्षित कर रहे है।