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रतनपुर में गाय पर हमला करने वाले युवक गिरफ्तार, रानीवाडा उपखंड की ताजा खबरों के आपका स्वागत।।
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Wednesday, 22 December 2010

झील सी सुंदरता पर बबूल का दाग

राव गुमानसिंह 
रानीवाड़ा!
प्रकृति इस बार तहसील क्षेत्र पर जमकर मेहरबान हुई है। चारों ओर जहां पहाड़ हरियाली से घिरे नजर आते हैं वहीं क्षेत्र के झरनों से आज भी कलकल करता पानी बह रहा है। प्रकृति की इसी मेहरबानी से क्षेत्र का वणधर बांध में इन दिनों झील सा झूमता नजर आ रहा है। पिछले साल तक सूख चुके इस बांध में इस बार पानी की इतनी आवक हुई है कि यहां ना केवल मछली पालन हो रहा है बल्कि पर्यटकों के लिए नौकायन का भी अवसर है। ऐसे में यहां पर्यटन की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इस मनोहारी केंद्र को भी सरकारी बेपरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। बांध के चारों ओर जहां जगह जगह बबूल खड़ा है वहीं कई लोग अवैध रूप से मशील लगाकर इसका पानी खींच रहे हैं। जिसे रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। प्रकृति मेहरबानी, प्रशासन बेपरवाह : इस बांध पर भले ही प्रकृति मेहरबान हो गई हो, लेकिन सरकारी उदासीनता यहां भी दिखाई दे रही है। बांध के चारों ओर बबूल की झाडिय़ां उग आई हैं। जिसके कारण यहां गंदगी रहती है। अगर इन झाडिय़ों को साफ कर दिया जाए तो यहां का सौंदर्य और भी निखर सकता है। बांध के तल में भी बबूल होने के कारण नाव संचालन में परेशानी आती है। इसके अलावा कुछ लोग यहां अवैध रूप से मशीन लगाकर पानी खींचने का भी काम रहे हैं। जिस पर भी अंकुश जरूरी है। स्थानीय लोगों ने कई बार इस संबंध में सिंचाई विभाग को ज्ञापन भी सौंपा है। 

पर्यटन की हैं संभावनाए

रानीवाड़ा तहसील क्षेत्र में वन्य जीव, धार्मिक और ऐतिहासिक ट्यूरिज्म की अपार संभावनाएं हंै, लेकिन इस धरोहर को पर्यटन के लिहाज से न तो सरकार समझ पाई और न ही निजी क्षेत्र। सरकार ने भी पर्यटन सर्किट पर कम ध्यान दिया है। रानीवाड़ा व जसवंतपुरा पहाड़ों और जगलों की गोद में बसे हैं। दोनो क्षेत्रों में कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हंै। रानीवाड़ा तहसील में वणधर व जेतपुरा बांध, सेवाड़ा का पातालेश्वर शिव मंदिर, सिलासन का सिलेश्वर मंदिर, वणधर की प्राचनी वावड़ी, कोटड़ा का आंद्रेश्वर मंदिर, कूड़ी महादेव मंदिर, रानीवाड़ा खुर्द के पहाड़ पर बिल्व वृक्षों का वन, बारहमासी सुकळ नदी, बडग़ांव गढ़ एवं जसवंतपुरा क्षेत्र में सुंधामाता मंदिर, भालू अभ्यारण्य, खोडेश्वर शिव मंदिर, कारलू बोटेश्वर मंदिर, जसवंतपुरा पर्वत पर मिनी माउंट समेत दर्जनों स्थल हैं। जहां हर साल सैकड़ों लोग आते हैं।

फिर होने लगा मछली उत्पादन

बांध में आया पानी यहां के लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर लेकर आया है। कुछ सालों पूर्व तक बांध में मछली उत्पादन होता था, लेकिन बीच में बरसात की कमी के कारण यह काम बंद करना पड़ा। इस साल हुई बरसात के बाद आए पानी में अब एक बार फिर यहां मछली उत्पादन किया जा रहा है। इसके लिए यहां बाकायदा निविदा की गई है। जिसके बाद ठेकेदार ने बांध में मछली के बीज छोड़े हंै। अभी मछली का आकार छोटा है। फरवरी माह के बाद मछली बड़ी होने पर जाल से उन्हें एकत्रित किया जा सकेगा। इसी प्रकार यहां नौकायन का भी काम शुरू किया है। शुरू शुरू में नाव संचालन मछली उत्पादन के लिए किया जा रहा था, लेकिन अब यहां आने वाले लोगों की फरमाइश पर उन्हें भी इसकी सैर करवाई जाती है। लबालब भरे बांध में लोगों के लिए नाव में सफर करना रोमांचकारी होता है। फोटोग्राफी के शौकिन लोगों को यहां की साइट पसंद आने लगी है।

बांध के संरक्षण के लिए प्रयास कर कार्ययोजना बनानी चाहिए

-बांध के खूबसूरत किनारें पर्यटकों को लुभाने के लिए पर्याप्त हंै। सरकार एवं जिला प्रशासन को यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर कार्ययोजना बनानी चाहिए।

- मोड़ाराम मेघवाल, वणधर



-बांध में जंगली बबूल झाड़ी का रूप ले रहे हंै। जो कि इसकी सुंदरता के लिए दाग है। प्रशासन को बांध के सरंक्षण व संवर्धन के प्रयास करने चाहिए।

- पृथ्वीसिंह राठौड़, मछली पालक, वणधर

Friday, 26 November 2010

कहीं खुशी तो कहीं कहर बनी मावठ

रानीवाड़ा
बे मौसम हुई बारिश ने क्षेत्र के किसानों में कहीं खुशी तो कहीं गम वाली स्थिति बना दी है। पकी हुई फसल को तैयार करने में जुटे किसान अब बारिश से हुए नुकसान पर आंसू बहा रहे हैं, तो जिन्हें सिंचाई को पानी चाहिए था वह खुश दिखाई पड़ रहे हंै। खेतों में खड़ी फसल आड़ी पड़ गई। पाटली कर बुवाई कर चुके किसानों का बीज पानी भरने से खेतों में ही दफन हो गया। सर्वाधिक खराबा बडग़ांव व रानीवाड़ा क्षेत्र में आंका जा रहा है। इन जगहों पर कई खेतों में धान की फसल कटकर रखी हुई थी। जो पानी भरने के बाद अब गलनेे लगी है। कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है शेष & पेज १३

कि जिन जगहों पर फसल कटकर रखी हुई थी उनके गलनेे की आशंका पैदा हुई है। शेष जगहों पर किसानों को बारिश से लाभ हुआ है।

प्रशासन कराए सर्वे

पूर्व सरपंच मैदाराम चौधरी ने फसलों में हुए खराबे का सर्वे कराने की मांग की है। कलक्टर को भेजे पत्र में बताया कि बरसात से क्षेत्र के कई किसान बर्बाद हो गए। खेतों में खड़ी फसल नष्ट हो गई तो बुवाई कर डाला बीज जमीन में ही दफन हो गया। पत्र में बारिश से हुए नुकसान का आकलन करा किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग की गई है। बडग़ांव गांव के किसान प्रताप मेघवाल ने बताया कि टमाटर, आलू, बैगन की फसल को भी तेज बारिश ने नष्ट कर दिया।

तारामीरा की बुवाई शुरू

तीन दिन पूर्व हुई मावठ की बारिश के बाद क्षेत्र में किसानों ने तारामीरा की बुवाई शुरू कर दी है। मावठ के बाद से किसान सुरक्षित फसल के रूप में तारामीरा फसल की बुवाई को ही बेहतर मान रहे हंै। क्षेत्र के करड़ा व खारा बेल्ट के गांवों में तारामीरा की बुवाई जोरों पर है। किसान आसूराम खींचड़ के अनुसार तारामीरा की फसल कम कीमत व कम पानी में तैयार होने के कारण किसानों में इसको लेकर खास रूचि है। करवाड़ा, दांतवाड़ा, कोड़का, कोटड़ा सहित कई एक फसली वाले क्षेत्र में इस पैदावार की ओर किसान आकर्षित हो रहे हंै।

Wednesday, 18 August 2010

ढीले पड़े मानसून के तेवर

रानीवाड़ा ! उपखंड में कुछ समय से सक्रिय मानूसन के तेवर ढीले पडऩे लगे हंै। अब तक उपखंड के विभिन्न ग्रामीणांचलों में सक्रिय मानसून मंगलवार को एकदम कमजोर पड़ गया। क्षेत्र में भी दिन भर उमस रहने से गर्मी का असर अधिक नजर आया। उमस के कारण लोगों के पसीने छूटते रहे। क्षेत्र में सुबह के समय मौसम साफ रहने के साथ ही तेज धूप खिली और उमस के कारण गर्मी का असर बढ़ गया। सुणतरनगरी में सुबह से ही मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आया। तापमान में कोई खास बदलाव नहीं आया। पूरे दिन उमस रहने से लोगों की परेशानियां बढ़ गईं। दोपहर के समय तीखी धूप लोगों को चुभने लगी और गर्मी का असर अधिक नजर आया। जिले में सर्वाधिक बरसात रानीवाड़ा में ही ९०४ मिमी रिकॉर्ड की गई है। किसानों ने खरपतवार निकालनी शुरू कर दी है।

Thursday, 29 July 2010

जोड़ बांध की दीवारों में दरार

रानीवाड़ा !(29.07.2010)
मालवाड़ा स्थित जोड़ बांध की दीवारों में दरार आने को लेकर ग्रामीणों ने बुधवार को एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि चार दिन पूर्व हुई बरसात से बांध लबालब हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग ७० दशक पूर्व इस बांध का निर्माण हुआ था। ऐसे में इसकी दीवारों में दरार आने से क्षतिग्रस्त होने की आंशका बनी हुई है। बांध के निरीक्षण को लेकर बुधवार को सरपंच दिवालीदेवी व लक्ष्मण गुलसर सहित कई वार्डपंचों ने मौका मुआयना किया। बांध की एक तरफ की दीवार में दरारें आने से बांध के फूटने की आंशका जताई गई। सरपंच ने बताया कि पांच दिन पूर्व उन्होंने प्रशासन को इस बांध की दीवार की मरम्मत को लेकर सूचना दी थी, परंतु कोई कार्रवाई नही हो पाई है। इसको लेकर ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।

Wednesday, 28 July 2010

आवागमन गत तीन दिनों से बंद

रानीवाड़ा।
गुजरात के रामसन व धानेरा के बीच रेल पटरियों के नीचे से रेती खिसक जाने से भीलड़ी-समदड़ी रेल मार्ग पर मालगाडिय़ों का आवागमन गत तीन दिनों से बंद है। मरम्मत का कार्य जोरों पर चल रहा है। रेल सूत्रों के अनुसार वहां पर अतिरिक्त श्रमिक लगाकर काम को तेजी प्रदान की गई है।
जानकारी के मुताबिक शनिवार को हुई तेज बारिश के कारण रामसन व धानेरा के बीच सामरवाड़ा गांव के पास एक पूल के पास बालू रेती का चार मीटर गड्डा हो जाने से टे्रक को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। रेल मार्ग पर परसों से ही मालगाडियों का आवागमन बंद कर दिया गया है। रानीवाड़ा रेलवे स्टेशन पर तीन दिनों से मालगाड़ी टे्रक सुधरने के इंतजार में खड़ी है। स्टेशन मास्टर सुबोध कुमार ने बताया कि टे्रक की मरम्मत के लिए आज मंगलवार सुबह जोधपुर से चार टीमें  रेलवे के उच्चाधिकारियों के साथ घटना स्थल पर पहुंच गई है। काफी तादाद में मशीनरी लगाई गई है। वहां पर दस मीटर लंबा, तीन मीटर चौड़ा व चार मीटर गहरा गड्डा हो जाने से आवागमन बाधित हुआ है। रामसन रेलवे स्टेशन पर भी बालू रेत के आ जाने से मीट्टी हटाने का कार्य जोरो पर चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार इस ट्रेक पर गुरूवार दोपहर तक मालगाडिय़ों का आवागमन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इस टे्रक पर रोजाना की बीस मालगाडिय़ा माल का परिवहन कर रही है। उक्त मालगाडियों को को दूसरे टे्रक पर डाइवर्ट कर दिया गया है।

Tuesday, 27 July 2010

बरसे इंद्र, झूमे धरती और झरने

पेड़ पौधा झील झरना गुलसितां बाकी रहे
इन परिंदों के लिए यह आसमां बाकी रहे

कवि राजेंद्र पासवान की यह पंक्तियां इन दिनों क्षेत्र में धरती के शृंगार पर सटीक बैठती हैं। इंद्र देव की मेहरबानी से इन दिनों धरती का सौंदर्य मन को भा रहा है और लोग खुश नजर आ रहे हैं। पिछले तीन दिन की बरसात के बाद क्षेत्र में कई जगहों पर झरनों का बहना शुरू हो गया है। जिसके कारण आस पास के कई स्थानों पर अब लोग पिकनिक मनाने पहुंच रहे हैं। सोमवार को हालांकि बारिश का दौर थम तो गया, लेकिन मौसम काफी सुहाना रहा। उपख्ंाड के सौमरा माताजी के पहाड़ से निकल रहे झरने अब कल कल करते हुए बह रहे हैं। मात्र एक सप्ताह पहले तक ही यहां तेज धूप के कारण आने का मन नहीं करता था और अब यह मनोरम स्थल बन गया है। 

रविवार की सुबह शुरू हुए झरनों से आस पास का माहौल भी खुशनुमा हो गया है। कोयल की कूंक, मेंढ़क की टर्र-टर्र व मोर की पीहू की मधुर आवाज यहां कुछ समय के लिए ठहरने को मजबूर करती है। चार साल के बाद शुरू हुए झरनों को देखने के लिए ग्रामीण जुट रहे हंै। पक्षियों का कलरव मन को आनंदित कर देता है। पहाड़ की शीर्ष पर स्थित प्राचीन जलाशय भी लबालब हो गया है। छोटे झीलनुमा इस जलाशय की धार्मिक महत्ता है। इसके दर्शन के लिए भी काफी श्रद्धालु उमड़ रहे है। पहाड़ की तलहटी पर स्थित एनिकट भी रविवार की बरसात से ओवरफ्लो हो गया है। इसी तरह सिलासन गांव के सिलेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालु दशनार्थ उमड़ रहे है। इसके अलावा सुंधामाता, खोडेश्वर मंदिर, उचमत, झरड़ाजी के स्थान से भी झरनें बहने से लोगों का जमावड़ा होने लगा है।

Sunday, 25 July 2010

इंद्र देव मुस्कुराएं, जमकर बरसी बदरा











रानीवाड़ा।(25.07.2010 -5PM)
तहसील क्षेत्र में पिछले 24 घंटे के दौरान इंद्र देव की मेहरबानी से लगभग सभी एनिकट व बांध के लबालब हो जाने की खबर मिली है। अच्छी बरसात होने से किसानों के चेहरे खिल उठे है। तहसील क्षेत्र में बारहमासी बहने वाली जेतपुरा व बडगांव नदियां जो कुछ माह से सुखी पड़ी थी, उनमे भी काफी तादाद में पानी आने से तटीय क्षेत्रों के कृषि कुंओं में भू-जल स्तर सुधरने की संभावना के चलते किसान काफी खुश नजर आ रहे है।
जानकारी के मुताबिक गत दो दिनों से तहसील क्षेत्र में लगातार हो रही तेज व मध्यम दर्जें की बरसात के कारण समग्र ग्रामीण क्षेत्र में पानी ही पानी नजर आ रहा है। आज जेतपुरा व बडगांव क्षेत्र के लोगों ने दोनों बारहमासी नदियों में पानी आने पर उनका ढोल व थाली बजाकर विधिवत पूजन कर जल स्वागत किया।  काफी तादाद में उमड़े लोगों ने आज नदियों में स्नान करने का भरपूर आनंद लिया। आज रविवार सवेरे हुई तेज बरसात के चलते जालेरा नालें के एनिकट में तीन फूट का ऑवरफ्लों चलने से दो घंटे तक सांचोर-रानीवाड़ा मार्ग का आवागमन ठप रहा। इसी तरह मालवाड़ा व कोड़ी नदी में रपट से चार फूट ऊपर तक पानी चलने से वहां भी काफी समय तक आवागमन बाधित रहा। जानकारी के अनुसार चिमनगढ़, तावीदर, लाखावास, सिलासन, रानीवाड़ा खुर्द, के बरसाती नालों में पानी के बहाव को लेकर लोगों को आवागमन में भारी समस्या का सामना करना पड़ा है। मौसम विभाग के अनुसार जेतपुरा बांध में पानी की अच्छी आवक होने से बांध का पांच फूंट का डेढ स्टोरेज भर चुका है। इसी तरह सिलासन बांध में भी साढे चार फूट पानी आने की खबर मिली है। सुंधामाता पर्वत के पास स्थित राजपुरा बांध में भी पानी की अच्छी आवक हुई है। सूरजवाड़ा, रोड़ा गांव के पास से बहने वाली सुकुल नदी दोनों किनारों को पार करते हुए गुजर रही है। वणधर बांध में भी अच्छे पानी आने से नहरी क्षेत्र के लोगों को काफी सुकुन मिला है। सौमेरा पहाड़ पर झरने बहना शुरू हो गए है। वहीं सौमेरा पहाड की तलहटी में नवनिर्मित एनिकट में पानी अत्यधिक आवक होने से उसकों काफी नुकसान होने का समाचार मिला है। सौमेरा पर्वत के ऊपर स्थित प्राचीन धार्मिक महत्व के तालाब के लबालब भरने की जानकारी मिली है। वहीं सुंधामाता पर्वतीय तिर्थ स्थल के झरने भी शुरू हो गए है। पर्वत के पिछवाड़े में स्थित अभिनव ब्रजमंडल में गौधाम पथमेड़ा के द्वारा निर्मित बांध में भी पानी के ऑवरफ्लों होने की जानकारी सुमन सुलभ ब्रह्मचारी के द्वारा दी गई है। आजोदर से मेड़क खुर्द जाने वाली डामर सड़क बरसाती पानी के चलते क्षतिग्रस्त हो जाने से रानीवाड़ा से मेड़क खुर्द का सम्पर्क कट गया है। मेड़क खुर्द जाने के लिए लोगों को अब मेड़क कलां होते हुए जाना पड़ रहा है।
जेतपुरा व बडग़ांव नदियों में पानी की तेज आवक के चलते प्रशासन सर्तक हो गया है। प्रशासन ने संभावित बाढ़ बचाव को लेकर अभी से उपाय शुरू कर दिए है। प्रशासन मिट्टी के कट्टों की व्यवस्था करवा रहा है, ताकि संभावित दुघर्टना से बचाव किया जा सके। जालेरा के सांपलाई बांध में भी बरसाती पानी की चादर चलने के समाचार मिले है। सांतरू का सोनारवाला एनिकट भी दूसरी बार ऑवरफ्लों होने से किसानों को काफी राहत मिली है।
मौसम विभाग के अनुसार रविवार सुबह आठ बजे तक पिछले 24 घंटे के दौरान ३५ मिमी बरसात दर्ज की गई है। इस तरह इस मानसुन के दौरान ४२४ मिमी बारिश दर्ज हुई है। अनाधिकृत सूत्रों के अनुसार आज रविवार सुबह आठ बजे से शाम छ: बजे तक ८० मिमी बरसात दर्ज की गई है। जिससे किसान लोगों को काफी राहत महसुस हो रही है।

Wednesday, 21 July 2010

बूंदों ने बढ़ाई उमस

रानीवाड़ा ! जोरदार बारिश में तर होने को बेकरार सुणतर क्षेत्र के लोगों को इन दिनों मौसम की बेरुखी अखरने लगी है। मंगलवार को दिन का तापमान लोगों का बदन झुलसाने वाला था। आसमान से आग बरस रही थी। इससे पूर्व तड़के करीब पौने तीन बजे के आसपास मामूली बरसात हुई जिससे थोड़ी देर के लिए राहत तो मिली, लेकिन उमस और चिपचिपाहट ने परेशान कर दिया। लोगों को अच्छी बरसात का बेसब्री से इंतजार है। तापमान बढऩे और उमस से भले ही क्षेत्रवासी परेशान हो रहे है मगर मौसम विभाग की मानें तो यह अच्छी बारिश का संकेत भी है। इन दिनों वातावरण नम रहने से उमस का जोर है। उमस पसीने नहीं सूखने देती है।

Monday, 12 July 2010

ग्रह नक्षत्रों से भी किसानों को आस

रानीवाड़ा(12.07.2010)
क्षेत्र में अब तक अच्छी बरसात से किसानों में खुशी और अच्छी फसल की उम्मीद है। हालांकि बरसात का दौर पिछले सप्ताह भर से थमा हुआ है, लेकिन बुजुर्ग लोग अब यहां चलने वाली हवाओं और ग्रह नक्षत्रों के आधार पर भी अच्छे जमाने की आस लगाए बैठे हैं। इन बुजुर्ग लोगों की मानें तो हवाओं का रुख और नक्षत्रों की स्थिति से भी फसल पर काफी प्रभाव पड़ता है। जो हवाएं अभी चल रही हैं वे क्षेत्र में बोई गई बाजरे की फसल के लिए अच्छी मानी जा रही हैं। वहीं नक्षत्रों की स्थिति से भी अच्छा प्रभाव होने वाला है। मानसून के प्रथम चरण में ही रानीवाड़ा क्षेत्र में १६० मिमी बरसात होने से लोगों ने चार दिन से बाजरा की बुवाई शुरू कर दी है। ऐसा मानना है कि आद्रा नक्षत्र में बाजरा की बुवाई करने से बाजरा अच्छी तादात में तैयार होता है। अब पुनर्वसु नक्षत्र शुरू हो गया है। इस नक्षत्र में भी बरसात होना अच्छा माना जाता है। इसी प्रकार अगर अश्लेषा नक्षत्र में बरसात होती है तो वह फसलों के लिए सही नहीं होती।

किसानों को चाहिए थोड़ी देरी से बरसात

खेतों में बीज बो चुके किसानों को अभी बरसात नहीं चाहिए। इन किसानों को मानना है कि अगर अभी बरसात होती है तो इससे नुकसान होगा। किसानों ने बताया कि २० जुलाई से ३ अगस्त के बीच बरसात होने पर बाजरे की फसल सोलह आना होने की संभावना है। ३ अगस्त के बाद अश्लेषा नक्षत्र शुरू होगा, जिसमें बरसात वर्जित मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि अश्लेषा में बरसात का पानी खारा होता है। जो फसलों के लिए सही नहीं है।

हवाओं का भी असर

इधर क्षेत्र में इस समय हवाएं चल रही हैं। इन हवाओं को लेकर भी किसानों की अलग-अलग राय है। कुछ लोग फसलों के लिए ऊनालु हवा अच्छी मानते हंै। ऐसी हवाओं से बाजरे का दाना जमीन में जल्दी अंकुरित होकर बाहर आ जाता है। सियालु हवा चलने पर बाजरा अंकुरित नही हो पाता है। यदि इसी तरह का मौसम चलता रहे तो जमाना अच्छा होने की संभावना है। बाजरे की बुवाई के बाद अब किसान कठोळ यानि मूंग, मोठ, ज्वार, चवला, ग्वार की बुवाई कर रहे हंै। पुनर्वसु नक्षत्र में कठोळ फसल की बुवाई से अच्छे परिणाम आना माना जाता है। वैसे क्षेत्र के खेतों में बाजरा खेतों में उगने लग गया है।

इनका कहना है

-मौसम फिलहाल किसानों के अनुकूल है। अभी तक अच्छी बरसात से हमें राहत मिली है। अब अगर थोड़े समय बाद बरसात होती है तो अच्छी फसल होगी।

- गोदाराम देवासी, 
सरपंच ग्राम पंचायत रानीवाड़ा

-अभी ऊनालु हवा चल रही है। जो किसानों व फसलों के लिए अच्छी है। बरसात के बाद हमने बुवाई की और अब खेतों में बाजरे के पौधे जल्दी उगने लग गए हैं।

- गलबाराम मेघवाल, 
किसान, मेड़ा किसान 


-खरीफ की तैयारी में लग गए हैं। मौसम उनके अनुकूल है। किसानों को आशा है कि इसके बाद अच्छी फसल होगी।

- कन्हैयालाल विश्नोई, 
सहायक कृषि अधिकारी रानीवाड़ा

Wednesday, 7 July 2010

जलाशय हुए लबालब

रानीवाड़ा।
उपखंड क्षेत्र में कल रात्री को मध्यम दर्जे की बरसात होने से कई नदी व नालों में पानी बहने के समाचार मिले है। दर्जनों एनीकट, नाडे व नाडिया पानी से लबालब भर गए है। जलाशयों की भौतिक स्थिति को देखने के लिए आज एसडीएम कैलाशंचद्र शर्मा ने कई गांवों का निरीक्षण किया। जालेरा कलां के एनीकट का निरीक्षण करने पर एनीकट लबालब होना पाया गया। साईड की दीवारों से पानी के लीकेज होने पर उन्होंने बीडीओं को तुरंत तकनिकी टीम वहां भेजकर लीकेज दूरस्त करने के निर्देश दिए। यह एनीकट सोमवार रात्री को बरसात से ऑवरफ्लो हुआ था। इसके भर जाने से किसानों के कृषि कुओं में भूजल चार्ज होने की आशा जगी है। शर्मा ने प्रधान राधादेवी के साथ जालेरा खुर्द के सापलाई बांध का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां पर ऑवरफ्लो की जानकारी लेकर पानी निकासी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। बांध में इस समय साढे छ: फूट पानी आने की जानकारी दी गई।
इसी तरह अच्छी बरसात होने से किसानों के चेहरे खिले हुए नजर आ रहे है। उपखंड के ग्रामीण क्षैत्र से आ रही खबरों के अनुसार मेडा का नाला भी कल रात्री को तीन घंटे तक चला। सिलासन व तावीदर बांध में भी पानी आने के समचार मिले है। लंबे समय से सुखी पड़ी जेतपुरा की सुकल नदी में भी पानी बहने लगा है। ग्रामीणों ने बताया कि जेतपुरा बांध में पानी की आवक शुरू हो गई है। सूरजवाड़ा के पास भी बहने वाली नदी में पानी की आवक शुरू होने से किसानों को राहत महसूस हुई है। मौखातरा गांव के नाले में कल रात्री को पानी की तेज आवक होने से भीलों की ढाणी में पानी घुस जाने से जन जीवन प्रभावित होने के समाचार मिले है। प्रशासन को जानकारी मिलने पर एसडीएम ने पटवारी को मौके पर भेजकर वस्तु स्थिति की जानकारी लेकर बाढ बचाव की व्यवस्था पुख्ता करने के निर्देश दिए। सेवाड़ा के पास बने एनीकट में पानी ऑवरफ्लों होने से साईड में बनी मिट्टी की दीवार पानी में बह जाने के समाचार मिले है। विकास अधिकारी ने आज सेवाड़ा में भी तकनिकी टीम भेजकर एनीकट को दूरस्त करने की तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। मिली जानकारी के अनुसार सेवाड़ा में मंगलवार शाम को ग्राम पंचायत ने जेसीबी लगाकर साईड की दीवारों को दूरस्त करने का कार्य शुरू कर दिया है।
तहसील सूत्रों के अनुसार मंगलवार सुबह 8 बजे तक रानीवाड़ा उपखंड मुख्यालय पर १५८ मिमी बरसात दर्ज की गई है। अच्छी बरसात होने से किसानों के साथ व्यापारियों को भी सकुन मिला है। आज मंगलवार को भी क्षैत्र में तेज गर्मी व उमस के चलते लोगों को देर रात्री को अच्छी बरसात होने की आशा है।

Sunday, 4 July 2010

मेहबाबा जमी पर उतरे, लोगों को मिली राहत

4July 2010. रानीवाड़ा।
उपखंड़ के कई हिस्सों में शक्रवार को दिनभर की तपिश व उमस के बाद रात्रि को आसमान से कहीं तेज बारिश तो कहीं बूंदाबांदी के रूप में राहत बरसी। परगना क्षेत्र के मेड़ा व गोलवाड़ा में कई बरसाती नालों में पानी चला। बारिश के बाद मौसम खुशगवार होने से दिनभर की गर्मी व उमस से त्रस्त लोगों ने राहत का अहसास किया। हालांकि सुबह से ही आसमान में बादल छितराए रहने तथा उमस के कहर से बारिश के आसार तो कई बार बने, लेकिन बारिश का दौर रात्रि ११ बजे से शुरू हुआ। दिनभर से जी उकता देने वाली गर्मी व उमस से परेशान लोगों ने राहत महसूस की। रात्रि ११ बजे मौसम ने अचानक करवट बदली और आसमान में काली घटाएं मंडरानी शुरू हो गई। शीतल बयार चलने के साथ ही घनघोर घटाओं से चारों ओर अंधकार छा गया। अचानक शुरू हुआ रिमझिम बारिश का दौर करीब आधे घंटे तक चला। मानसून की बारिश होने की उम्मीदें हरी हो गई। करड़ा में बूंदाबांदी से सड़के गीली हो गई, लेकिन यह दौर कुछ मिनट ही चला। रानीवाड़ा तहसील के कई इलाकों, बडग़ांव, धानोल, जाखड़ी, रानीवाड़ा खुर्द, डुंगरी, धामसीन, आखराड़, मौखातरा, कोटड़ा, रतनपुर समेत कई जगह हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हुई। कस्बे में तो देखते ही देखते सड़कों पर पानी चलना शुरू हो गया।